Original Waste Decomposer (OWDC) का पूरा वैज्ञानिक सत्य
किसानो और बागवानो के बीच वेस्ट डीकंपोजर को लेकर कई भ्रांतिया और धारणाए फैली हुई है। कुछ लोग इसे अत्यधिक प्रभावी मानते है, जबकि कुछ इसे अप्रभावी समझते हे। हमारे एक्सपर्ट के अनुभव के आधार पर, इन भ्रांतियो को दूर करने का प्रयास किया हे और इस पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जानकारी प्रदान की गई है।
वेस्ट डीकंपोजर का विज्ञान
वेस्ट डीकंपोजर को समझने के लिए सबसे पहले इसके विज्ञान को समझना जरूरी है।
यह एक प्रकार का जैविक घोल है जिसमे सूक्ष्म जीवाणुओ की भरपूर मात्रा होती है। इन जीवाणुओ का कार्य जमीन मे मौजुद जैविक अपशिष्ट पदार्थो को डीकंपोज करना होता है, जिससे जमीन की उर्वरक शक्ति मे वृद्धि होती है और पौधो को पोषण आसानी से मिल जाता है। इस प्रक्रिया मे गुड और OWDC का उपयोग किया जाता है, जो जीवाणुओ का पोषण करते है और उनकी संख्या बढाते है।
वेस्ट डीकंपोजर तैयार करने की प्रक्रिया
कच्चे माल की जानकारी
- पानी – 200 लीटर
- वेस्ट डीकंपोजर – 50 मिली
- पुराना गुड – 2 किलो
वेस्ट डीकंपोजर को घर पर तैयार करना बेहद आसान है। इसे बनाने के लिए 200 लीटर पानी के ड्रम मे एक छोटी डिब्बी (लगभग 50 मिली) वेस्ट डीकंपोजर डाले। इसके बाद, 2 किलो पुराना गुड मिलाए। गुड जीवाणुओ का भोजन है, जिससे उनकी संख्या तेजी से बढती है। इस मिश्रण को 5 से 7 दिन तक मिलाते रहे ताकि गुड समान रूप से घुल जाए और जीवाणु पूरी तरह से सक्रिय हो जाए।
जब यह तैयार हो जाए, तो इसे पौधो मे डाल सकते है। ड्रिप सिंचाई प्रणाली के माध्यम से इसे पौधो तक पहुचाने का सबसे अच्छा तरीका है।
OWDC काम कैसे करता है ?
यह जीवाणु जमीन मे जाकर वहा के अपशिष्ट पदार्थो को डीकंपोज कर पौधो के लिए पोषण उपलब्ध कराते है। आपकी मिट्टी मे जैव पदार्थ जैसे की गोबर या अन्य बायो डिग्रेडेबल पदार्थ (जिसमे नूट्रिशन वैल्यू हो) होना चाहिए, तभी यह जीवाणु जमीन मे जाके उस जैव पदार्थ को डिकॉम्पोस्ट करके पोधो को नूट्रिशन दे सकेंगे।
देखा जाए तो यह किसान के लिए डबल महेनत का काम है क्युकी जैविक घोल भी तैयार करना रहता है और जमीन मे भी गोबर वगेरा जैविक खाद डालना पडता है।
आप OWDC के एडिशन मे अड्वान्स जीवअमृत का उपयोग कर सकते है। यह कॉमपोस्टिंग बेग मे बनाया जाता है। और यह पोशाक तत्वो से भरपूर होता है तो आपको जमीन मे कुछ जैव पदार्थ डालने की जरूरत नही रहेती, आप सबकुछ जीवमृत ट्यूब मे डाल के काम्पोस्ट कर सकते है और डायरेक्ट लिक्विड खाद जमीन मे देने से जमीन और पोधो दोनो को बेनेफिट करता है।
ज्यादा जानकारी के लिए यहा पढे। >> एडवांस जीवमृत बनाने की विधी
वेस्ट डीकंपोजर का प्रभाव
कच्चे गोबर या अन्य अपशिष्ट पदार्थो को जमीन मे डालने से वे आसानी से डीकंपोज नही हो पाते, जिससे दीमक जैसी समस्याए उत्पन्न हो सकती है। लेकिन वेस्ट डीकंपोजर के माध्यम से इन पदार्थो को जल्दी और प्रभावी तरीके से डीकंपोज किया जा सकता है। यह प्रक्रिया पौधो की जडो को नुकसान पहुँचाए बिना मृदा की उर्वरकता बढाती है।
केमिकल और जैविक खेती का तालमेल
वेस्ट डीकंपोजर तभी प्रभावी होता है जब इसे जैविक खेती के साथ प्रयोग किया जाए। अगर आप केमिकल खाद का उपयोग करते है, तो यह जीवाणुओ को खत्म कर सकता है, जिससे वेस्ट डीकंपोजर का प्रभाव कम हो जाता है। इसलिए, अगर आप जैविक खेती करना चाहते है, तो केमिकल का उपयोग बिलकुल न करे। जैविक खेती के अन्य तत्व जेसे जीवामृत, नीम खली, कॉमपोस्टिंग बेग आधारित अड्वान्स जीवामृत, गोमूत्र आदि भी वेस्ट डीकंपोजर के साथ उपयोग किए जा सकते है।
नतीजे और अनुभव
अनुभव से पता चलता है कि जैविक तरीके अपनाने से जमीन की उर्वरक शक्ति बढती है और पौधो मे रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढती है। नियमित रूप से जैविक पदार्थो का प्रयोग करने से जमीन मे प्राकृतिक रूप से केचुए और अन्य उपयोगी जीवाणु पनपते है, जो जमीन की संरचना को सुधारते हैं।
निष्कर्ष
वेस्ट डीकंपोजर का उपयोग न केवल जमीन की उर्वरता को बढाता है, बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित है। किसान अपने अनुभव से सीखते है, इसलिए नए प्रयोग करते रहे। वेस्ट डीकंपोजर का प्रयोग जैविक खेती मे लगातार करे और देखिए कि आपकी जमीन और फसले कैसे पोषण से भरपूर हो जाती है।
अगर यह जानकारी आपके लिए उपयोगी हो, तो इसे दूसरे किसान भाई क साथ शेयर करे और अपने जैविक खेती के सफर को एक कदम आगे बढाएं।
अगर आपको कोई प्रश्न है तो नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स मे कमेन्ट करे।


Leave a Reply
Want to join the discussion?Feel free to contribute!